हम जैसे दीखते हैं वैसे होते नही अक्सर ये सभी के साथ होता है कोई छिपा के रखता है कोई बता भी देता है।। एक उदहारण :- RJ Khursheid : (माइक का फेडर ओन) नमस्कार सस्त्रिअकाल कैसे हो दिल्ली के लोगो मोसम बदल रहा है बदल जाने दो पर खुद को बदलने न देना , वैसे मेरे एक बात समझ नही आती की आदमी पैसे के पीछे इतना क्यों भागता है , माना की पैसा आज की ज़रूरत है पर क्या इसकी खातिर हम अपने रिश्ते खराब नही करते चंद कागज़ के टुकडो की वजह से आज परिवार टूट रहे हैं यहाँ तक की गर्लफ्रेंड भी छोड़ के भाग जाती है, तो भाई अगर खुश रहना है तो पैसो की खातिर अपने रिश्ते ना टूटने दो, SONG : क्यों पैसा पैसा करती है क्यों पैसे पर तू मरती है RJ Khursheid : (माइक का फेडर ऑफ करने के बाद अपने सहकर्मी से ) इस कमीने बॉस ने पिछले एक महीने से मेरी सेलरी रोक रखी है अब साला जेब मैं पैसे नही है दिल करता है इसका मर्डर कर दूँ खुद तो ऐश करता फिरता है और हम यहाँ कंगाल शो कर रहे हैं अगर इसने इस बार सेलरी नही दी तो इसका सर फोड़ जाऊंगा फिर जो होगा देखा जायेगा पैसे के बगैर ज़िन्दगी तबाह है ... ) शेर : हर आदमी मै...
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Showing posts from 2013
हमें खुद ही खुद को बदलना हैं
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सीमापुरी बॉर्डर से आनंद विहार की तरफ आज मैं यानी आपका (अंतर्यामी बाबा) अपने मनोरंजन हेतु फिल्म देखने के लिए जा रहा था, आनंद विहार से कुछ दूर पहले ही एक हौंडासिटी कार एक स्कूटर वाले को जिसके साथ उसकी एक बच्ची भी थी तकरीबन 4 साल की होगी साइड मार कर बड़ी तेज़ी से भाग गई .. बाबा ने अपनी लाल रंग की स्टाइलिश बाइक रोड पर रोकी और लाल बत्ती की तरह खड़ी कर दी जिससे कोई उस तरफ ना आये और जल्दी से उस आदमी को उठा या और उस बच्ची को भी रोड की साइड मैं ले गया और जो रोड पर उसका स्कूटर था वो भी साइड मैं लगा दिया और फिर बाकी लोग भी गाडी रोक के सहायता के लिए आगे आ गये आदमी की टांग मैं चोट आई थी कपडे लगभग फट गये थे और बच्चे के सर मैं गहरी चोट आई थी, पर खून नही बह रहा था जो खुद का शुक्र हुआ, जिस गाडी ने साइड मारी थी वो गाडी तो देखी पर नज़र कमज़ोर होने के कारण नंबर नोट नही कर पाया और एक वजह शायद ये भी थी की जो स्कूटर वाला रोड पर गिर पड़ा था उसे उठाने की वजह से नंबर नोट नही कर पाया .. खेर आज दिल्ली मैं ये देख के संतोष हुआ की लोग हेल्प के लिए तुरंत आगे आये .. और एक कार वाले महोदय ने उन्हें अस्पताल चलने को कहा ...
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# ये जाति भूली क्यों नही जाती, याद रखना है तो मानवता याद रखो ... # तुम दूर जाओ तो बेचेनी मुझे होती हैं, महसूस कर के देखो मुहब्बत ऐसी ही होती है। # बोहत मगरूर होते जा रहे हो, मुहब्बत में कमी करनी पड़ेगी ... :) # जहाँ भी अपनी मुहब्बत डवलप करने की कोशिश करता हु वही कोई न कोई अमरीशपुरी पैदा हो जाता है # अगर आप खुद को दिल्ली मैं असुरक्षित मानती हैं तो दिल्ली पुलिस से कहिये यकीन मानिये फिर "कुछ नही होगा" क्योंकि दिल्ली पुलिस कुछ करती ही नही ;) ;) # बोहत अजीब है ये मोहब्बत का खेल भी, एक थक जाये तो दोनों हार जाते हैं ... :) # किताबें पढ़ कर तो हर कोई शायर बन जाता हैं पर हम कुछ हटके हैं हम ऑटो और ट्रक पढ़ के शायर बने हैं .. मुलायजा फरमाइए ... अमीर की ज़िन्दगी बिस्कुट और केक पर , ड्राईवर की ज़िन्दगी स्टिअरीन्ग और ब्रेक पर ... ;) सोच लो बड़ा शायर बनना है तो बड़े बड़े ट्रक पढो।। : # आज अफ़सोस हो रहा है अपने हाल ऐ ज़िन्दगी पर, काश कभी किसी से हद से ज्यादा मुहब्बत न की होती तो बाबा बन्ने की नोबत ना आती .... -- बाबा आज सेंटी हैं...
मोबाइल ने कर दिया है सब काम आसान
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जब मोबाइल का दौर शरू हो रहा था लगभग 2000 के करीब लोगो के हाथो मैं मोबाइल आने लगे थे पर उतनी क्रांति नही आई थी उन दिनों, एक मैगज़ीन के लिए एक आर्टिकल लिखा था " मोबाइल सेवा " तब मैंने भविष्य को सोच कर वो कल्पना की थी जो अब हालत हो गई है, मसलन सब्जी को फ़ोन करके सब्जी मंगवाई जाएगी कही पास मैं जाना हो तो रिक्शे वाले को फ़ोन करो आ जायेगा, पर अब ये आम बात है फोन आते ही सब मोबाइल हो गये हैं तुरंत इधर से उधर ... चलो मोबाइल आ गये बोहत सुविधा हो गई घंटो का काम मिनटों मैं अब हो जाता है , पर अब समस्या ये है अब मोबाइल मोबाइल ना होकर ससुरा सब कुछ हो गया है ... इंटरनेट, गाने सुन लो, रेडियो भी है यही ही फिलिम भी चलती है, पर सुविधा है तो दुविधा भी तो आनी थी वो भी ससुरी आ ही गई, अब ई साला इसमें गड़बड़ ये है सुनो : मैंने एक मल्टी मीडिया मोबाइल खरीदा है मेमोरी कार्ड भी मिला है तो दुकानदार से कहा भाई तनिक इसमें सत्संग और भजन डाल दो मन रमा रहेगा, बोला वो वाली फिलिम भी डाल दूँ ? हम कहे नहीं भैया हम फिलिम नही देखते कहने लगा वो वाली, अरे भाई वो पर इतना जोर क्यों द...
Kuch acchi baatain
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Kìsì Se Judä hönä ägär itnä äsän hötä ‘Khursheid to’Jisäm se Rööh kö lene käbhi färishte nähi ääte… “SURA FATIHA”Allah K Gazub Sey Bachati Hai.“SURA YASEEN”Qiyamat K Din Pyaas Sey.“SURA WAQIA”Fikar or Faaqay Sey.“SURA MULK”Azab-e-Qabar Sey.“SURA KOSAR”Dushmano Ke Dushmani Sey.“SURA KAFiROON”Mout K Waqt Kufr Sey.“SURA IKHLAAS”Munafiqat Sey.“SURA FALLAK”Hadson Sey.“SURA NAAS”Waswasoun Sey Gift 4 u. Umeed-e-wafa na rakh un Logoun se Khursheid.Jo miltay hain kisi se hotay hain kisi k. Dhup me Saya_e_diwar zruri to naiTere baad koi or pyar zruri to naiJeet lenge tujhe ek din dunya se,Hr dafaa ho hmari haar zruri to nai.
हाय ..! अबला युवा तेरी यही कहानी ;) ;)
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हद्द हो गई अब तो, जैसे हर जगह आरक्षण की वजह से जनरल केटागिरी वाले अपने ही देश मैं दोयम दर्जे के नागरिक बन गये हैं वैसे ही डेल्ही मेट्रो मैं दिल्ली या युवा दोयम दर्जे का पेसेंजर बन गया हैं एक तो महिलाओ के लिए पूरा डब्बा आरक्षित हैं दूसरा बाकी हर सीटो पर 2 सीट आरक्षित हैं और उनमें से 2 सीट वरिष्ट नागरिक और वृद्धो, और विकलांगो के लिए आरक्षित हैं जो बाक़ी बची सीट हैं वो युवा वर्ग के लिए है पर ये आरक्षित सीट और डब्बा भर जाये तो सबकी नज़र ( महिला, वृद्धो, विकलांगो, और वरिष्ठ नागरिक ) उन युवाओं पर टिक जाती हैं फिर क्या करें सम्मान वश उसे वहां से भी उठाना पड़ता हैं, अगर उठने का मन ना हो तो गर्दन नीचे झुका के बैठना पड़ता हैं उसपर भी मन मैं ग्लानि तो होती ही हैं अब क्या करें युवा इस पर कुछ पंक्तिया --- अबला युवा तेरी यही कहानी, आखों मैं शर्म, बर्बाद है जवानी ! ना नोकरी है झोली मैं,और छोकरी की तरफ देखना भी हुई बात पुरानी ..! कोई जगह नही है अब तेरी यहाँ, दिशा हीन है तेरी जिंदगानी। ...........................हाय ..! अबला युवा तेरी यही कह...