हम जैसे दीखते हैं वैसे होते नही अक्सर ये सभी के साथ होता है कोई छिपा के रखता है कोई बता भी देता है।।
एक उदहारण :- 
RJ Khursheid : (माइक का फेडर ओन) नमस्कार सस्त्रिअकाल कैसे हो दिल्ली के लोगो मोसम बदल रहा है बदल जाने दो पर खुद को बदलने न देना , वैसे मेरे एक बात समझ नही आती की आदमी पैसे के पीछे इतना क्यों भागता है , माना की पैसा आज की ज़रूरत है पर क्या इसकी खातिर हम अपने रिश्ते खराब नही करते चंद कागज़ के टुकडो की वजह से आज परिवार टूट रहे हैं यहाँ तक की गर्लफ्रेंड भी छोड़ के भाग जाती है, तो भाई अगर खुश रहना है तो पैसो की खातिर अपने रिश्ते ना टूटने दो, 

SONG : क्यों पैसा पैसा करती है क्यों पैसे पर तू मरती है 

RJ Khursheid
: (माइक का फेडर ऑफ करने के बाद अपने सहकर्मी से ) इस कमीने बॉस ने पिछले एक महीने से मेरी सेलरी रोक रखी है अब साला जेब मैं पैसे नही है दिल करता है इसका मर्डर कर दूँ खुद तो ऐश करता फिरता है और हम यहाँ कंगाल शो कर रहे हैं अगर इसने इस बार सेलरी नही दी तो इसका सर फोड़ जाऊंगा फिर जो होगा देखा जायेगा पैसे के बगैर ज़िन्दगी तबाह है ... )

शेर : हर आदमी मैं होते हैं दस बीस आदमी, जिसको भी देखिएगा ज़रा गौर से देखिएगा ;)

Comments

Popular posts from this blog